देसी बीवी और बहन की सामूहिक चुदाई हुयी ट्रैन में

अब वो तीसरा आदमी मेरी बहन के ऊपर चढ़ा और उसकी गांड सहलाने लगा. कला डर के मारे पीछे मुड़के देखने लगी. उसकी आँखें फटी के फटी रह गयी. तीसरे का लंड तीनो में सबसे बड़ा और मोटा दिख रहा था, वह रिक्वेस्ट करने लगी के गांड में मत डालो, तभी पहले वाले ने कला को आगे की तरफ पकड़ के गिरा दिया. अब वो बड़े अजीब पोजीशन में थी. उसकी गांड ऊपर की तरफ उठी थी, पर आगे का भाग पहले वाले के लंड की तरफ था. उसने पूरी ताकत से उसे पकड़ा था.

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तीसरे वाले ने कला की गांड पर थोड़ा थूक लगाया और अपनी मोती ऊँगली अंदर पेल दी. कला चिल्ला उठी. पहले वाले ने झट अपना कला बदबूदार लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया और उसे नीचे दबा दिया। अब कला बड़ी मुश्किल में थी, उसके मुहमे लंड था, और गांड फटने वाली थी. तीसरे आदमी ने कुछ देर ऊँगली अंदर-बाहर की और फिर अपने लंड पे थूक लगाया और कला के गांड पे रख दिया. कला ने अपनी आखें बंद कर ली, अब वो कुछ नहीं कर सकती थी, उसकी गांड का अब भोसड़ा बजने वाला था. तीसरे ने ज़्यादा देर न करते, अपना लंड एक झटके में अंदर पेला तोह मुहमे लंड होते हुए भी कला चिल्ला पड़ी, अभ लंड आधा भी अंदर नहीं गया था, पर कला की जान जैसे निकलने लगी थी. उस आदमी ने थोड़ा आराम दिया और फिर झटका मारा तोह उसने लंड पूरा अंदर चला गया. कला दर्द के मारे थर्रा उठी, पर उसके मुँहमे पहले से भी एक लंड होने के वजह से ज़्यादा चीख नहीं पायी.

उधर दूसरी तरफ मेरी बीवी लता की ठुकाई चल रही थी, उसके पेअर पूरी तरह हवा में थे और वह मुस्लिम आदमी उसकी चूत एक जानवर के तरह चोद रहा था. लता के चुचे मज़े में ऊपर नीचे हिल रहे थे. कुछ देर लता की चूत चुदाई और कला की गांड ठुकाई चलती रही. कला की हालत बहुत बुरी थी, उसके चूत से तो वैसे ही पानी और खून टपक रहा था, अब गांड दे भी खून निकल रहा था. करीब १०-१५ मिनट कला की गांड मारने के बाद तीसरे आदमी ने उसके गांड के अंदर अपना पानी छोड़ दिया. कला बा बेहोश से हो चुकी थी. अपना पानी छोड़ने के बाद उसने कला को एक तरफ कर दिया और पानी और खून से सना लंड मेरी बीवी लता के मुँहमे घुसेड़ दिया. लता बड़े चाव से उससे चाटने और चूसने लगी. अब कला लगभग बेहोश थी. उसके गांड और चूत से खून निकलने के वजह से सीट लाल हो गया था. उसके अंदर थोड़ा भी ताक़त नहीं था के उठकर अपने कपडे पहन ले या खुद को साफ़ कर ले. वो ऐसे ही नंगी लेती रही और दर्द के वजह से सिसकती रही.

अब बीवी का बजा बजने वाला था और उसे भी ये एहसास हो गया था की उसकी अब पूरी तरह बलात्कारी चुदाई होने वाले है. अब उसे घोड़ी बना दिया गया दूसरा आदमी लता के नीचे लेट गया और उसकी चुत में अपना लंड डालके चोदने लगा, तीसरे वाले का बदबूदार लंड तो पहले से ही वह चूस रही थी. अब साइड में बैठे आदमी ने मेरी बीवी के ऊपर अपनी पोजीशन ली और उसकी गांड चाटने लगा. लता को गांड मरवाना पसंद है और मैं उसकी गांड पहले भी मार चूका हु पर इन तीनो ले लंड मेरेवाले से काफी बड़े थे और उसे ये पता था तभी उसकी आँखों ने थोड़ा डर था. थोड़ी देर उसकी गांड चाटने सहलाने के बाद उसने अपने लंड पे थोड़ा थूक लगाया और लता के गांड में पेल दिया. लता को अचानक बहुत दर्द हुआ और उसके आँखों में आंसू आ गए. दर्द कुछ ज़्यादा ही था इसलिए वह रोये जा रही थी. गांड थोड़ी खुली होने के वजह से उस आदमी का लंड पूरा अंदर चला गया था पर मोटा और बड़ा होने के वजह से लता की गांड फट गयी थी और उसे दर्द हो रहा था. अब दृश्य ऐसा था के लता के मुँह में एक लंड , चूत में एक और गाँड़ में एक लंड था और तीनो तरफ से ठुकाई और पेलाई हो रही थी. वो ऊपर नीचे, आगे पीछे हो रही थी और रो और चिल्ला रही थी. करीब १५-२० मिनट छोड़ने के बाद एक के बाद एक तीनो ने अपना माल पानी लता के मुँहमे, चूतमे और गांडमें निकाल दिया और उसे साइड में धकेलके बैठ गए. बीवी की हालत कला की बराबर थी. उसकी गांड से भी खून आ रहा था और वो बड़ी थकी हुई लग रही थी. मैं अपने बर्थ में लेते, सोने का नाटक करते हुए सब मज़े से देख रहा था.

बीवी लता और बहन कला, दोनों करीबन ३० मिनट बाद उठे और अपने आप को साफ़ करने लगे. वह तीनो आदमी अभी नंगे ही थे और उन्होंने दोनों को कपडे पहनने नहीं फिर से दोनों के जबरदस्त चुदाई हुयी. इस बार दोनों बगल बगल में चुदी, दोनों के गांड मारी गयी और चूत का बजा बजाया गया. ऐसा करीब २-३ बार हुआ. कला और लता मानो अधमरी हो गयी थी. उनसे बैठा, लेटा नहीं जा रहा था. सुबह ४ बजे तक चुदाई कार्यक्रम चलता रहा और इस बीच दोनों ५-६ बार चूड़ी. ५ बजे वो तीनो एक स्टेशन में उतर गए और मेरी बीवी और बहन नंगी ही लेटी रही. दोनों नींद में ऐसे ही लेटी रही. मैं उतरा और दोनों के चादर डालके वापस ऊपर आके सो गया. कुछ ३० मिनट बाद एक चाय वाला आया चाय बेचने और बीवी की नंगी गांड देखी तो खड़ा होके आस पास देखा और अपना लंड निकल के उसे चोदने लगा. बीवी की पूरी वाट लगी थी, उसे अब कोई भी चोद दे, पता नहीं चलनेवाला था. कुछ देर चोदकर उसने अपना पानी बीवी की चेहरे पे निकल दिया. बीवी सोती रही. वो चायवाला चला गया.

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तब मैंने दोनों को नींद में होने का नाटक करते हुए आवाज़ लगायी की अपना स्टेशन आने वाला है, तैयार हो जाओ. १० मिनट बाद दोनों उठी और नंगी हो टॉयलेट चली गयी. १०-१५ मिनट बाद अपने आप को साफ़ करके आयी और कपडे पहने. फिर मैं भी उतरा और फ्रेश होके नीचे बैठ गया. हम तीनो अब चुप-चाप जबलपुर आने का इंतज़ार करने लगे. इतने में वही चायवाला फिर आ गया. मैंने उससे ३ चाय लिए. उसने चाय देते हुए बीवी के तरफ देख कर मुस्कुरा दिया और उसने भी मुस्कुरा दिया. चायवाला पैसे लेके चला गया.

१ घंटे बाद जबलपुर आ गया और हम उतर गए. लता और कला को चलने में दिक्कत हो रही थी. मैंने पुछा क्या हुआ, तोह दोनों ने पीरियड्स का बहाना बनाया. मुझे तो पता था के क्या हुआ था उनको. खैर हम वह से एक होटल में चेकइन कर शादी में शामिल हुए, पर मुझे पूरा शक था के अब मेरी बहन और बीवी पूरी रंडी बन चुकी है और चुदवाती होंगी दुसरो से. खैर ये कहानी यही समाप्त होती है. अगले बार नयी कहानी के साथ फिर मिलेंगे.

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