दीदी के साथ मेरी भी चुत का सील टूटी

मैं अपने पूरे होश में आ चुकी थी कि में क्या कर रही थी, मुझे वो सब कुछ अच्छी तरह से समझ में आ गया, फिर जीजाजी ने गुस्से में आकर मेरी दीदी को भी एक थप्पड़ मार दीए और वो बोले कि साली रंडी तुझे नहीं पसंद तो तू इसको भी क्यों मना कर रही है? इसको तो मेरे साथ मज़ा लेने दे और इतना कहने के बाद जीजा जी ने मेरी दीदी के कपड़े जबरदस्ती उतारकर अपने खड़े लंड को उन्होंने दीदी की बुर में बहुत बेरहमी से एक जोरदार धक्का देकर अंदर डाल दीए, लेकिन उनका आधा ही लंड दीदी की बुर के अंदर गया था और दीदी दर्द की वजह से बहुत ज़ोर से चिल्ला रही थी, वो दर्द से तड़प रही थी,

फिर यह सब कुछ अपनी आखों के सामने देखकर मेरी बुर से पानी बाहर आ गया, एक तो में पहले से ही बहुत गरम थी और दूसरा मेरी दीदी की चुदाई मेरे सामने होने लगी, जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो चुकी थी, सब कुछ मेरी समझ से बाहर था कि में क्या करूं? तभी मेरी बैचेनी को मेरे जीजाजी झट से समझ गए और वो मुझे अपनी तरफ खींचकर मेरी बुर में ज़ोर ज़ोर से अपनी दो उँगलियों को डालकर मेरी भी चुदाई करने लगे, जिसकी वजह से मेरी बुर अब कुछ ज्यादा ही व्याकुल हो उठी..

में वो सब किसी भी शब्दों में लिखकर आप लोगों को नहीं बता सकती कि में उस समय कैसा और क्या महसूस कर रही थी, अब मैंने समय को देखते हुए तुरंत अपनी दीदी से आग्रह किया कि प्लीज दीदी मेरे भी अंदर डालने दो ना और दीदी उस समय अपनी चुदाई होने के साथ साथ रो रही थी…

फिर जीजा ने मुझे पकड़ा और वो मुझे नीचे लेटाकर मेरे दोनों पैरों को ऊपर उठाकर उन्होंने दीदी की बुर से खींचकर अपना लंड बाहर किया और अब वो धीरे से अपने लंड को मेरी बुर में डालने लगे, में बिना हलचल किए उनके सामने पड़ी रही और वो मेरी बुर पर अपने लंड का हल्का हल्का दबाव बनाते हुए लंड को अंदर करने लगे….

दोस्तों सिर्फ़ उनके लंड का टोपा ही मेरी बुर के अंदर गया था, लेकिन उसकी वजह से ही मुझे बहुत दर्द हो रहा था, में उस असहनीए दर्द से तड़पने लगी और सिसकियाँ ले रही थी आईईईईइ ,,,माँ में मर गई उफ्फ्फ्फफ्फ ,,प्लीज थोड़ा धीरे करो ,,मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन मेरे बेरहम जीजा ने कुछ भी ना सुनते हुए अपना लंड मेरी बुर के अंदर पूरा डाल ही दीए, वो अब जमकर धक्के देकर मेरी चुदाई करने लगे और तब जीजाजी, में और दीदी सब नंगे पूरी रात तक बारी बारी से मज़े ले रहे थे और अब तो दीदी की बारी थी…

तब मैंने उनको बहुत किस किए और उसके बूब्स को भी मैंने बहुत देर तक चूसा दबाया, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आया, उस समय जीजा जी मेरी बुर को कुत्ते की रह अपनी गरम जीभ से चाटने लगे, मुझे तो उस दिन जैसे जन्नत मिल गई और 6 इंच के लंड से मेरी चुदाई भी हो गई और फिर में जब तक वहां पर रही और तब तक में हर रात को अपनी दीदी की बुर को चुदते हुए देखती थी और उनकी बुर में अपनी उंगली को भी डाल देती थी जिससे मुझे उनकी बुर अंदर तक गुलाबी के दर्शन हो जाते थे, लेकिन अब मुझे अपने घर भी जाना था, क्योंकि में अपनी दीदी के ससुराल में दो दिन तक रुक गई थी, इसलिए में वापस अपने घर आ गई…

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फिर उसके बाद में अब कॉलेज में अपनी चुदाई करवाने के लिए दमदार लड़को की तलाश करने लगी और में बहुत से लड़को को ऐसे ही किस दे देती और उनके लंड को भी कपड़ो के ऊपर से किस कर लेती, तो लगातार कॉलेज जाने के बाद भी मुझे अपनी चुदाई का कोई भी जुगाड़ नहीं मिला, मुझे हर रात को अपनी उँगलियों से ही अपनी बुर को शांत करना पड़ा और एक दिन जब में अपने कॉलेज से घर आई, तो मैंने देखा कि आज मेरे घर पर मेरे सामने मेरे जीजाजी और दीदी बैठी हुई थी…

दोस्तों पहले तो मुझे उनको देखकर विश्वास नहीं हुआ, फिर उनसे बात करने और अपनी दीदी से गले लगने के बाद में समझ गई और में उन दोनों को देखकर बहुत खुश हो गई, क्योंकि एक बार फिर से मुझे आज रात को उनके साथ अपनी बुर को चुदवाने का असली मज़ा आएगा और वो सुख मिलेगा जिसके लिए में तरस रही थी, फिर जब शाम हुई तब जीजाजी और में छत पर आ गए और जीजाजी कुछ देर बाद वहीं पर शुरू हो गए और में भी शुरू हो गई, हम दोनों ने एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिए और में साथ में उनका लंड दबा रही थी और वो मेरे बूब्स को दबा रहे थे, लेकिन तभी दीदी भी छत पर आ गई और वो बोली कि तू कभी भी नहीं सुधरेगी…

अब मैंने दीदी को लपककर पकड़ लिया और मैंने उनकी सलवार को ज़बरदस्ती उतार दीए और उनके बूब्स को बहुत जमकर दबाया और चूसा, फिर जीजाजी ने इतनी देर में मेरे कपड़े उतार दिए और उन्होंने अपने लंड को मेरे मुहं में डाल दीए और उन्होंने हल्के हल्के धक्के देकर मेरे मुहं की चुदाई करना शुरू कर दीए, फिर तभी कुछ देर बाद मुझे उल्टी आ गई, क्योंकि मैंने उससे पहले कभी भी किसी के लंड का पानी नहीं पिया था, दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची घटना जिसको में आप लोगों तक पहुँचाने के बारे में बहुत समय से सोच रही थी, लेकिन आज बता ही दीए..

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