भूमिका की गांड चुदी बस में

फिर मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था और लंड देखकर मेरे मुहं में तो पानी आ रहा था.. लेकिन यह मुझे बहुत ग़लत लग रहा था। अंकल ने तभी मेरे होंठ पर हल्के से स्मूच दे दिया। बस उस स्मूच के बाद तो में उनकी दीवानी हो गयी। तभी अंकल ने मुझे बालों से हल्का सा पकड़ा और दोनों हाथों से धीरे धीरे नीचे बढ़ाते हुए अपने लंड पर मेरा मुहं झुका दिया। तो मैंने भी अपना मुहं खोल लिया ताकि में भी उस मोटे से लंड के मज़े ले सकूं। फिर मैंने अपने होठों को दबाकर अंकल के लंड के सुपाड़े को चूसने लगी और अंकल मेरे सर को दबा रहे थे और में अंकल के सुपाड़े पर अपना सर ऊपर नीचे कर रही थी। फिर जब तक उनका लंड खड़ा नहीं हुआ.. तब तक तो ठीक था.. लेकिन जैसे ही मेरे चूसने की वजह से उनका लंड बड़ा हुआ मेरा पूरा मुहं उनके लंड से भर गया और मुझे लगा कि मेरे मुहं में एक गरमा गर्म केक हो जिसे में चबा नहीं सकती और अंकल हल्के हल्के आवाज़ निकाल रहे थे। तो मैंने अपनी जीन्स का बटन खोल दिया और उसे थोड़ा नीचे सरका दिया।

फिर अंकल ने मेरी काली पेंटी को बहुत दिक्कत के बाद मेरे गोरे गोरे चूतड़ो के बीच से खींचकर नीचे जांघो तक सरकाया और फिर अंकल मेरी चूत को उंगलियों से सहला रहे थे और में कुतिया की तरह झुककर लंड चूसने लगी थी। अंकल मेरी चूत से खेल रहे थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उनकी मोटी मोटी मर्दाना उंगलियाँ मेरी गांड की दरार में खलबली मचा रही थी। तभी एकदम से अंकल ने एक उंगली मेरी चूत में घुसा दी और गोल गोल घूमाने लगे। तो में मस्ती में आकर अपने सभी तरीक़ो से उनका लंड चूस रही थी और मैंने अंकल को इशारे से बताया कि ज़ोर ज़ोर से करो मेरी चूत टपकने वाली है। तो अंकल हंसने लगे और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत में उंगली करने लगे और झुककर मेरे चूतड़ पर अपनी जीभ से चाटकर थूक लगाने लगे और मेरी चूत अब झड़ने वाली थी और में ऊपर उठकर हल्के से मोन करने लगी तो अंकल ने मुझे चुप रहने को कहा।

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फिर अंकल ने मेरा हाथ अपने लंड पर रखा और खुद ही मेरे हाथ पकड़ कर मूठ मरवाने लगे.. उधर मेरा पानी निकल गया था और में बहुत खुश थी.. तो मैंने अंकल के होंठ पर एक किस किया।

अंकल : बाहें छोड़ साली.. पकड़े जाते अभी.. धीरे धीरे मोन किया कर।

में : सॉरी और में उन्हें चूमने लगी।

अंकल : साली रंडी.. मेरा लंड कौन चूसेगा और में उनके खड़े हुए मोटे लंड पर जोर जोर से मुहं चलाने लगी.. जब अंकल का निकलने वाला था तो उन्होंने एक हाथ से मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुहं को अपने लंड पर ऊपर नीचे धकेलने लगे और एक हाथ मेरे चूतड़ पर घुमाने लगे। जैसे ही उनका लंड निकलने लगा तो उन्होंने मेरा मुहं और नीचे दबा दिया और मेरी गर्दन टाईट पकड़कर और बहुत तेज़ और अपनी कमर हिलाकर हल्के झटके मारने लगे और मेरी गांड के छेद में उसी टाईम अपना अंगूठा डाल दिया और मुझे हल्का सा दर्द हुआ। अंकल ने मेरे मुहं में ही पिचकारी मार दी जिसे मुझे पीना पड़ा। पता नहीं कितने सालो से अंकल ने अपने लंड में इतना वीर्य जमा किया था और कुछ वीर्य टपकने लगा जिसे देखकर अंकल की हंसी छूट पड़ी। तो मैंने जल्दी से उनकी शर्ट से साफ किया और सीधी होकर कपड़े ठीक किए।

अंकल : अरे यह क्या किया तूने? मेरी शर्ट से ही साफ कर लिया।

में : यह वीर्य आपका ही है.. आप खुद ही संभालो इसे।

अंकल : अच्छा तो पहली एक्सरसाईज़ आ गयी तुम्हे?

में : हाँ बहुत अच्छे से अंकल।

अंकल : यही है मेरी प्यारी एक्सर्साइज़ दिन में तीन बार करना कम से कम एक महीने तक और वो गंदी सी स्माईल देने लगे। तो मैंने पूछा कि अच्छा तो बाकि की एक्सर्साइज़ कब करवाओगे अंकल।

अंकल : साली रंडी बड़ी जल्दी है तुझे.. तू कहे तो में यहीं पर तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँ? फिर अंकल की इन गंदी बातों को सुनकर मेरी पीठ के बीच से होते हुए मेरी चूत तक एक सिहरन दौड़ गयी। नतीजा मेरी चूत से कुछ रस की बूँदें निकलने लगी।

में : मुझे तो बहुत जल्दी है क्या आपको नहीं?

अंकल : ठीक है तो आजा चढ़ जा मेरे लंड पर।

तो में उठी और अपनी जीन्स और पेंटी फिर से नीचे सरकाकर अंकल की गोद में झट से बैठ गयी साईड में खिड़की से बाहर देखते हुए मानो मुझे कुछ खबर ही ना हो कि हो क्या रहा है? अंकल ने अपना लंड निकाला जो कि मुरझाया था और उसे मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगे.. मानो लंड को मेरी गांड सुंघा रहे हो और सच में ऐसा ही हुआ लंड तुरंत ही बड़ा होने लगा.. मानो कि मेरी गांड की खुश्बू ने उसे उकसा दिया हो। अंकल मेरी गांड में लंड घुसाने की पूरी कोशिश करने में जुट गये।

में : प्लीज वहाँ पर नहीं।

अंकल : क्यों? चुपचाप बैठी रह एक तो इतनी मोटी गांड लिए पागल बना रही है और ऊपर से मना कर रही है इतनी चिकनी गांड है कि साला मक्खन भी शरमा जाए।

में : वाह मेरी गांड की इतनी तारीफ़ अच्छा चलो मार लो.. लेकिन जान प्यार से।

फिर मैंने अपनी गांड ढीली छोड़ दी और अंकल ने अपना लंड गांड पर बड़ी ताक़त से दबा दिया और में एकदम से उछल पड़ी।

अंकल ने फिर मेरी टॉप नीचे खींचकर मुझे बूब्स से पकड़ लिया और उन्हें शायद लग रहा था कि में कहीं भाग ना जाऊँ। फिर बूब्स मसलते मसलते अंकल मेरी नंगी पीठ पर किस करने लगे और लंड से मेरी नाजुक गुलाबी गांड पर दबाव बढ़ने लगे.. ओह अह्ह्ह माँ.. फिर मैंने उन्हें कहा कि थोड़ा धीरे करो और फिर उनका टोपा अब मेरी गांड में घुस गया था और मेरी तो जान गले में ही अटक गयी। फिर पता नहीं कैसे.. लेकिन में अपने आप को चिल्लाने से रोक पाई। अब एक बार जब अंकल का लंड घुस चुका था तो फिर उन्होंने पीछे मुड़ने का नाम नहीं लिया और वो तब तक मेरी गांड को नीचे और अपने लंड को ऊपर सरकाते गये.. जब तक उनकी काटें जैसी झांटे मेरे मुलायम चूतड़ो पर ना चुभने लगी। फिर मेरी गांड लगातार लप लप कर रही थी और मेरी आँख में आँसू भर आए थे। तो अंकल ने मुझे अपने लंड पर कुछ मिनट तक एसे ही रखा और वो मेरे बूब्स को बहुत ज़ोर से दबाने लगे। थोड़ी देर तक ऐसा करते हुए उन्होंने नीचे से मुझे झटके लगाना चालू किया।

एक झटका फिर कुछ देर में एक और तगड़ा झटका.. फिर थोड़ा रुके और एक और ज़ोरदार हमला मेरी गांड पर कर दिया। ऐसे करते करते उन्होंने बहुत गांड का मज़ा लिया। फिर उन्होंने एकदम से मुझे थोड़ा ऊपर उठा दिया और अपना लंड लप की आवाज़ के साथ बाहर निकाल लिया.. मुझे बड़ा मज़ा आया जब वो मोटू लंड मेरी गांड के बाहर आ गया। फिर मैंने गांड पर उंगली घुमाकर देखी तो.. हे भगवान् इतना बड़ा छेद हो गया था।

अंकल : चल रंडी इस लंड को अब चूस चूसकर चिकना कर दे।

में : नहीं.. यह तो बहुत गंदा हो गया है।

अंकल : भेन की लोड़ी नाटक मत कर. बिना चिकना किए गांड में लेगी तो दर्द ही होगा.. कुछ नहीं होगा यह तो सेक्स में नॉर्मल है।

तो में मान गयी और मैंने बहुत सारा थूक लगाकर उनका लंड चिकना कर दिया और फिर से उनकी गोद में धम्म से बैठ गयी.. लेकिन इस बार अंकल ने लंड को मेरी गांड की और तीर की तरह कर रखा था और फिर मेरे बैठते ही मेरी गांड में शर्रररर घुस गया। फिर अंकल ने मुझे थोड़ा आगे झुका दिया और लग गये मेरी गांड का भूत उतारने में और उन्होंने झड़ने तक मेरी ऐसी गांड मारी कि मुझे मेरी नानी याद आ गयी। फिर एक दो यात्रियों को तो हम पर शायद शक भी हो गया होगा.. लेकिन अंकल का लंड मेरी गांड में था तब तक मुझे किसी का डर नहीं था। मुझसे अब रहा ना गया और में एक हाथ से अपनी चूत को रगड़ने लगी और कुछ ही देर में दो बार झड़ गयी।

दोस्तों गांड और चूत एक साथ मरवाने में कितना मज़ा आता होगा.. मेंने इसका अनुमान लगाया। अंकल कुछ देर में मेरी गांड में ही झड़ गये।

अंकल : भूमिका.. में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

में : क्या? सॉरी अंकल लगता है आप ज्यादा ही भावुक हो गये हो।

अंकल : अरे पगली आदमी चुदाई के बाद ऐसे ही हो जातें है।

में : अच्छा तो ऐसी बात है और हम लड़कियाँ सोचती है कि आप सीरीयस हो सचमुच। फिर अंकल को मुझ पर बड़ा प्यार आया और वो मेरे बालों और बोबों के साथ खेलने लगे। फिर एकदम से कंडेक्टर उठा और उसने कहा कि बस रुकने वाली है जिसे भी लंच करना है या फ्रेश होना है यहाँ पर हो जाए.. क्योंकि इसके बाद कोई स्टॉप नहीं है। तो अंकल ने कहा कि चलो कपड़े ठीक करो बहुत भूख लगी है।

में : अंकल अगर में आपको अपने चूतड़ पर मसाला लगाकर दे दूँ तो कैसा लगेगा?

अंकल : अब आई ना लाईन पर.. लाईफ सफल हो जाएगी तेरी फ्राई गांड का मुरब्बा और अनगिनत डिश अंकल ने मेरी गांड पर ही मुझे गिना दी और ऐसी ही मसालेदार बातें करते हुए हम बस से नीचे उतरे और फिर इधर उधर घूमते हुए अंगड़ाई लेने लगे। में पूरी कोशिश कर रही थी कि लंगड़ा कर या अजीब ढंग से ना चलूँ.. लेकिन अंकल ने मेरी ऐसी ठुकाई की थी कि सीधे चलना बहुत मुश्किल था। फिर में लेडीस के वॉशरूम पहुँची और कपड़े वगेराह ठीक किए और मुहं हाथ साफ किए वैसे तो मुझे अंकल के लंड का स्वाद पसंद था.. लेकिन फिर भी में अपने साथ टूटपेस्ट लाई थी ताकि मुहं एकदम फ्रेश कर सकूँ। फिर में तैयार होकर जल्दी से टेबल पर पहुँची जहाँ पर अंकल मेरा इंतज़ार कर रहे थे हमने ऑर्डर किया और इतनी मस्त चुदाई से होने वाली कैलोरी की कमी को बहुत कुछ खाकर पूरा किया। अंकल ने अपना और मैंने अपना पेमेंट किया और हम साथ जाने लगे।

फिर मैंने इधर उधर देखा तो पाया कि कई मर्दो की नज़रें हम पर टिकी हुई थी मानो कह रहे हो बेवकूफ़ लड़की इस बुड्ढे के साथ क्या कर रही है? फिर हम दोनों बस में आ गये और दो मिंट की गोलियाँ खाई और फिर बैठकर बातें करने लगे। अंकल ने अपने घर के बारे में बताया और अपनी फेमिली के बारे में भी। जब वो अपनी वाईफ के बारे में बता रहे थे तो पता नहीं क्यों मुझे जलन महसूस हो रही थी और उन्होंने बताया कि कैसे वो और उनकी वाईफ सेक्स करते थे।

अंकल : भूमिका क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है या था?

में भी अब अंकल को जलन महसूस करने का मौका नहीं खोना चाहती थी।

में : हाँ है कॉलेज में और पहले भी पाँच रह चुके है।

अंकल : कोई शक नहीं तुम बहुत सुंदर हो।

अंकल : वो सब दिखते कैसे है मेरा मतलब अगर तुम मुझ जैसे ज्यादा उम्र वाले से चुद सकती हो तो लगता है वो ख़ास नहीं दिखते होंगे।

में : नहीं नहीं एक से बढकर एक हीरा था.. मतलब कि वो दिखने में बहुत अच्छे थे।

अंकल : फिर तुम्हे क्या में पसंद आया?

में : हाँ मुझे आप अच्छे लगते हो और आपके साथ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। तो अंकल ने मुझे किस किया और कहा कि चल अब एक और एक्सर्साइज़ बाकी है तो में हंसने लगी।

अंकल : चुदेल साली.. हंस मत आज मुझे तेरी चूत फाड़नी है। चल अब घोड़ी बन जा। में जो सीट और आगे की सीट होती है उसके बीच की जगह में घोड़ी बन गयी। अंकल ने मेरी पेंट उतार दी और फिर पेंटी को खींचकर निकाल दिया। अंकल ने अब मुझे घुटने पर झुकाकर मुझे नीचे कर दिया जिससे कि मेरे चूतड़ पीछे को हो गये और मेरा पेट मेरे घुटनो पर आ गया और मेरे हाथ मेरी छाती पर थे। अंकल ने अब मेरे पैरों को अपनी जाँघ के नीचे दबा दिया जिससे कि मेरे चूतड़ अंकल के लंड पर रगड़ खाने लगे। अंकल सीट पर सीधे तरीके से बैठे थे और में बस में कुतिया के पोज़ में और भी सिकुड गयी थी। अंकल ने अब लंड मेरी चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर सरका दिया.. अंकल का लंड साईड से लेने में बड़ा अच्छा लग रहा था.. लेकिन थोड़ा दर्द हो रहा था। थोड़ी देर बाद जब अंकल ने पिस्टन की तरह ऊपर नीचे बड़े ही सफाई से और ताल में कमर हिलाना शुरू किया तो मेरा सारा दर्द मज़े में बदल गया। में अब अपनी गांड को कभी ऊपर नीचे हिलाकर तो कभी चूतड़ गोल गोल घुमाकर अंकल के लंड से अपनी चूत को रगड़वा रही थी। एक बार मेरा सारा रस निकल चुका था और मेरी जांघो से होता हुआ अंकल की जांघ के साईड में बह रहा था।

फिर अंकल ने रस अपनी उँगलियों से समेटा और जोर ज़ोर से साँस लेकर सूंघने और चाटने लगे। फिर उन्होंने मेरा रस मुझे भी चटा दिया और में अपने गोल गोल गोरे चूतड़ हिलाकर अंकल को मज़े दे रही थी और खुद भी बहुत मजे ले रही थी। करीब आधा घंटे ऐसा करने के बाद ही अंकल के लंड से कुछ आखरी बची बूँदे भी मेरी चूत ने चूस ली। इस बीच में बहुत बार झड़ गयी थी और बहुत थक गयी थी।

अब यह हसीन सफ़र अब ख़त्म होने वाला था। तो मैंने अपने कपड़े ठीक किए और अंकल से उनका मोबाईल नंबर लिया और उन्हें अपना ग़लत नंबर दिया और में बस स्टॅंड पर पहुंचकर अपनी मंज़िल की और चल पड़ी ।।

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